
एक दिन दोस्तों ने पूछा, तू कैसे कविता लिख़ जाता है,
अपनी रचनाओं के लिए, कहाँ से इतने विचार लाता है,
मैं बोला, मैं तो बस दुनिया को उसका, अक्स दिखाता हूँ,
कि दिल मैं उठी उमंग, और फिर कुछ लिख़ जाता हूँ,
उगती किरणों के साथ, चिडियों की चहचहाट सुनाता हूँ,
मस्ती में झूमते बच्चो की खुशी को बताता हूँ,
बड़ों से मिली नसीहतो को, आप सब तक पहुंचता हूँ,
कि आँखें खुली, देखा बाहर, और कुछ लिख़ जाता हूँ,
रात में आये सपनो की, कुछ कहानियाँ सुनाता हूँ,
इस ज़िन्दगी में मिले लोगो की, रवानियाँ सुनाता हूँ,
दोस्तों के साथ गुजारें पलों कि, बातें करता पाता हूँ,
कि आई तेरी याद, और मैं फिर कुछ लिख़ जाता हूँ,
किसी की आँखों का हाल, शब्दों मैं लिख़ जाता हूँ,
किसी की मुस्कुराहटो को, बयां कर जाता हूँ,
नज़्म नहीं, गीत नहीं, लिखा बस हाल है तेरा,
की हुई बात तुझसे, मैं फिर और कुछ लिख़ जाता हूँ,
अपनी रचनाओं के लिए, कहाँ से इतने विचार लाता है,
मैं बोला, मैं तो बस दुनिया को उसका, अक्स दिखाता हूँ,
कि दिल मैं उठी उमंग, और फिर कुछ लिख़ जाता हूँ,
उगती किरणों के साथ, चिडियों की चहचहाट सुनाता हूँ,
मस्ती में झूमते बच्चो की खुशी को बताता हूँ,
बड़ों से मिली नसीहतो को, आप सब तक पहुंचता हूँ,
कि आँखें खुली, देखा बाहर, और कुछ लिख़ जाता हूँ,
रात में आये सपनो की, कुछ कहानियाँ सुनाता हूँ,
इस ज़िन्दगी में मिले लोगो की, रवानियाँ सुनाता हूँ,
दोस्तों के साथ गुजारें पलों कि, बातें करता पाता हूँ,
कि आई तेरी याद, और मैं फिर कुछ लिख़ जाता हूँ,
किसी की आँखों का हाल, शब्दों मैं लिख़ जाता हूँ,
किसी की मुस्कुराहटो को, बयां कर जाता हूँ,
नज़्म नहीं, गीत नहीं, लिखा बस हाल है तेरा,
की हुई बात तुझसे, मैं फिर और कुछ लिख़ जाता हूँ,
3 comments:
Wah janab!
Truly speaking, this poem is very..... nice. so, mr. kavi ye shayari ki ada kahan se sikhi..........
Apne vicharon ko bahut hi achha sabdon me dhala hai..bas ye hi kah sakta hoon..
Good Going..
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