यारों आपको एक थिएटर के Night Show की, दास्ताँ सुनाता हूँ,
उसमें चल रहे चलचित्र के साथ, लोगो के बदलते Expressions बताता हूँ,
Movie नई Release हुई थी, और बड़े नामों से सजी हुई थी,
सभी लोग Movie की पटकथा को नई और रोमांचक बता रहे थे,
असली में लडकियां Hero और लड़के Heroien को देखने जा रहे थे,
चलचित्र का Hero जवान , बुद्धिमान और College में पढ़ रहा था,
Heroine अमीर और सुंदर थी जिस पर नखरो का बुखार चढ़ रहा था,
जहाँ Screen पर Hero, Heroine के नखरो से त्रस्त था,
वहीं Corner Seat पर लड़का, अपनी पडोसन के साथ व्यस्त था,
दोनों को देख, बगल में बैठे बूढे को भी जोश आया,
और उसने इशारे से बुढ़िया को, Unsensored Scene दिखाया,
बूढे का इरादा समझ, पहले तो बुढिया सकपकायी
फिर Emotion Control कर, धीरे से बुदबुदायी,
ये जवानी का जोश है, जो अब शुरू होकर सुबहे तक जाएगा,
आपकी तरह नही, की शुरू होने से पहले ही ठंडा पड़ जाएगा,
Heroine अब शादी कर अपने ससुराल जा चुकी थी,
और सास की सेवा कर, तिजोरी की चाबी पा चुकी थी,
ये देख Family में आई एक नई दुल्हन, बहुत डर रही थी,
क्यूंकि उसकी सास, उसका Comparison Filmy बहु से कर रही थी,
इधर सास का Expectation Level उपर जा रहा था,
उधर बहु को अपना Future सोच, पसीना आ रहा था,
तभी Light जली, और Theater मैं उजियारा छा गया,
ये देख पिचली सीट पर बैठे लड़के का दिल बोला,
"साला अभी तो मूड बना था, ये INTERVAL कहाँ से आ गया",
INTERVAL होते ही, लड़की को भूख लग आई थी,
और लड़के से उसने, Popcorn और Coke मंगाई थी,
Multiplex के दाम देख, लड़के को पसीना आया,
और वो, बस एक Small Popcorn और Coke लाया,
1 Popcorn और Coke देख लड़की ने पुछा,
बस अपने लिए लाये हो, मुझे क्या भूखा रहना पड़ेगा,
इस पर लड़के ने अपना पैंतरा फैंका, और बोला,
"जान दोनों बाँट के खाएँगे, तो प्यार और बढेगा",
इतने में लाइट बुझी, और पूरे Theater में अँधेरा छा गया,
कुछ मनचलों ने हरकतें की और बोले, "यार मजा आ गया"
अब Movie का अंत करीब आ चुका था,
वाहीं खलनायक, अत्याचाको का Peak पा चुका था,
इधर वो Heroine को अड्डे पर नचा रहा था,
उधर कोई सीटियाँ, तो कोई गालियाँ सुना रहा था,
मार्मिक और संवेदनशील Climex देख, जहाँ कुछ लोग रो रहे थे,
वहीं कुछ लोग आराम से अपनी सीट पर, A/C में मजे से सो रहे थे,
सीटियों और गालियों के बीच Movie का अंत आ गया था,
और अंत में आलिंगन का द्ष्य, Censor Board खा गया था,
Movie से निकलते हुए, सभी दर्शक मुस्कुरा रहे थे,
कुछ इसे Blockbuster, तो कुछ पैसा वसूल बता रहे थे,
Movie से निकलती एक Family, बड़ी खुशी जाता रही थी,
लेकिन उनके छोटे बच्चे की सूरत, कुछ और ही व्यथा गा रही थी,
Movie देख एक विचार, उसके जेहन में बैठ जाता है,
अगर बाप शराबी और अत्याचारी हो, तभी बच्चा Hero बन पाता है,
ये सो़च अपना भविष्य जानकर, बच्चा बड़ा दुखी हो गया था,
क्यूंकि शरीफ बाप पाकर, उसके Hero बनने का Chance खो गया था।
Friday, August 28, 2009
Monday, May 25, 2009
देश का SOFTWARE इंजिनियर
इस देश के बड़े शहरों में एक नया culture आया है ,
इसको और कोई नही पढ़ा-लिखा software इंजिनियर लाया है,
ये दाल रोटी, नहीं विदेशी ठप्पे वाला burger खाता है,
और पेट निकलने, पर A/C Gym की Trade Mill पर पाता है,
बस थोडी सी कसरत करने में, पसीने से चूर हो जाता है,
और a/c Resturent में जाकर, वो fat-free जूस मंगाता है,
स्कूल के दोस्तों से ज़्यादा करीब, उसके ONLINE यार है,
माँ की रोटी से ज़्यादा उसे, SUBWAY की SALAD से प्यार है,
Weekend का नाम सुनते ही उसका चेहरा, खुशी से खिल जाता है,
Friday रात की शराब का नशा, Monday तक मुश्किल से जाता है,
देर रात तक काम के नाम पर बस chatting करता पता है
और उसे appraisal के समय अपना hard work बताता है,
Process follow करने की आदत उसमें इतनी परिपक्व है,
उसके पास अपनी सभी प्रेमिकाओं के Backup है,
Hike एवं Promotion की चाह में सभी Companies में घूम जाता है,
और ONSITE की चाह में वो, बांग्लादेश तक घूम कर आता है,
US RETURN के बाद, भारत की हर चीज़ को UNHYGENIC पता है,
खाने में उसको, SANDWITCH और MINIRAL WATER भाता है,
"When I was in US" और "Sorry" तो, ऐसे ज़बान पर चढ़ जाता है,
और ठेले वाले को भी अंग्रेजी में बात कर, क्रेडिट कार्ड दिखता है
उसका जीवन, सब भौतिक सुविधाओं को पाने की दौड़ में व्यस्त है,
और छुट्टियो के लिए वो, अपने MANAGER से त्रस्त है,
वो अपने देश से प्यार, तो अपार करता है,
और देश भक्ति की EMAIL FORWARD कर,विचार करता है
देशवासिओं की व्यथा पढ़कर, ये गमगीन हो जाता है,
फिर रात मैं किसी PUB में, अपना गम मिटाता है
देश की कमियाँ उजागर करने मैं वो EXPERT है,
लेकिन देश सुधार का बीडा उठाने में, जिस्मी हर्ज़ है
अगर ऐसा रहा तो ये युवा, एक ऐसी सभ्यता लायेगा,
जिसमें मेरा देश, शायद अपनी पहचान खो जाएगा।
इसको और कोई नही पढ़ा-लिखा software इंजिनियर लाया है,
ये दाल रोटी, नहीं विदेशी ठप्पे वाला burger खाता है,
और पेट निकलने, पर A/C Gym की Trade Mill पर पाता है,
बस थोडी सी कसरत करने में, पसीने से चूर हो जाता है,
और a/c Resturent में जाकर, वो fat-free जूस मंगाता है,
स्कूल के दोस्तों से ज़्यादा करीब, उसके ONLINE यार है,
माँ की रोटी से ज़्यादा उसे, SUBWAY की SALAD से प्यार है,
Weekend का नाम सुनते ही उसका चेहरा, खुशी से खिल जाता है,
Friday रात की शराब का नशा, Monday तक मुश्किल से जाता है,
देर रात तक काम के नाम पर बस chatting करता पता है
और उसे appraisal के समय अपना hard work बताता है,
Process follow करने की आदत उसमें इतनी परिपक्व है,
उसके पास अपनी सभी प्रेमिकाओं के Backup है,
Hike एवं Promotion की चाह में सभी Companies में घूम जाता है,
और ONSITE की चाह में वो, बांग्लादेश तक घूम कर आता है,
US RETURN के बाद, भारत की हर चीज़ को UNHYGENIC पता है,
खाने में उसको, SANDWITCH और MINIRAL WATER भाता है,
"When I was in US" और "Sorry" तो, ऐसे ज़बान पर चढ़ जाता है,
और ठेले वाले को भी अंग्रेजी में बात कर, क्रेडिट कार्ड दिखता है
उसका जीवन, सब भौतिक सुविधाओं को पाने की दौड़ में व्यस्त है,
और छुट्टियो के लिए वो, अपने MANAGER से त्रस्त है,
वो अपने देश से प्यार, तो अपार करता है,
और देश भक्ति की EMAIL FORWARD कर,विचार करता है
देशवासिओं की व्यथा पढ़कर, ये गमगीन हो जाता है,
फिर रात मैं किसी PUB में, अपना गम मिटाता है
देश की कमियाँ उजागर करने मैं वो EXPERT है,
लेकिन देश सुधार का बीडा उठाने में, जिस्मी हर्ज़ है
अगर ऐसा रहा तो ये युवा, एक ऐसी सभ्यता लायेगा,
जिसमें मेरा देश, शायद अपनी पहचान खो जाएगा।
Thursday, May 21, 2009
मेरा देश और राजनीति
आइये मैं आपका परिचय, अपने देश से करता हूँ,
और यहाँ की जनता, एवं राजनीति समझाता हूँ,
हमारे देश की जनता, बड़ी दिग्भ्रमित है ,
इस देश मैं कोई उच्च हैं, तो कोई दलित हैं,
अपने फैसले को, ख़ुद नही समझ पाती हैं,
और हर पाँच साल में, फिर से चोट खाती है,
कभी पंजा, कभी चक्का, कभी साइकिल चलाती है,
और कभी सबके जुगाड़ से, हाथी को बैठाती हैं,
जहाँ आम आदमी अपनी मेहनत से, देश सींच रहा है,
वहीं हमारा नेता जनता का धन, अपने घर खींच रहा है
ये अहिंसा और जनहित के नाम पर, अपनी कमजोरी छुपाता है,
और अपने घर के लिए, आतंकवादी स्वतंत्र कराता है,
ये वाही हैं जो कुर्सी के लिए, गन्दी राजनीति चलाता है,
और अपने स्वार्थ में, देश में टुकडे और दंगे कराता है।
अगले दिन फिर देश के नाम, उसका शान्ति शंदेश आता है,
और इन सब के लिए, विदेशी ताकत, और विपक्ष जो जिम्मेदार बताता है,
कहता है दंगे में मारा हर आदमी, उसका अपना भाई था,
और जो बच गया, वो विपक्ष का भेजा हुआ कसाई था,
हम लोग फिर भावनाओं में बहकर, उसे माफ़ कर जाते हैं,
और फिर एक कमजोर को, अपनी देश की गद्दी पर बैठाते है,
फिर से पाँच साल वो नेता, पुरानी कहानी दोहराता है,
फिर हमको लूट, देश और थोड़ा खोखला कर जाता है,
धर्म, जात, धन और क्षेत्रवाद के नाम पर हम,
एक नेता से, जाते है सब अपने अधिकार हार,
जय हो मेरे देश का प्रजातंत्र,
जय हो यहाँ की राजनीति का व्यापार।
और यहाँ की जनता, एवं राजनीति समझाता हूँ,
हमारे देश की जनता, बड़ी दिग्भ्रमित है ,
इस देश मैं कोई उच्च हैं, तो कोई दलित हैं,
अपने फैसले को, ख़ुद नही समझ पाती हैं,
और हर पाँच साल में, फिर से चोट खाती है,
कभी पंजा, कभी चक्का, कभी साइकिल चलाती है,
और कभी सबके जुगाड़ से, हाथी को बैठाती हैं,
जहाँ आम आदमी अपनी मेहनत से, देश सींच रहा है,
वहीं हमारा नेता जनता का धन, अपने घर खींच रहा है
ये अहिंसा और जनहित के नाम पर, अपनी कमजोरी छुपाता है,
और अपने घर के लिए, आतंकवादी स्वतंत्र कराता है,
ये वाही हैं जो कुर्सी के लिए, गन्दी राजनीति चलाता है,
और अपने स्वार्थ में, देश में टुकडे और दंगे कराता है।
अगले दिन फिर देश के नाम, उसका शान्ति शंदेश आता है,
और इन सब के लिए, विदेशी ताकत, और विपक्ष जो जिम्मेदार बताता है,
कहता है दंगे में मारा हर आदमी, उसका अपना भाई था,
और जो बच गया, वो विपक्ष का भेजा हुआ कसाई था,
हम लोग फिर भावनाओं में बहकर, उसे माफ़ कर जाते हैं,
और फिर एक कमजोर को, अपनी देश की गद्दी पर बैठाते है,
फिर से पाँच साल वो नेता, पुरानी कहानी दोहराता है,
फिर हमको लूट, देश और थोड़ा खोखला कर जाता है,
धर्म, जात, धन और क्षेत्रवाद के नाम पर हम,
एक नेता से, जाते है सब अपने अधिकार हार,
जय हो मेरे देश का प्रजातंत्र,
जय हो यहाँ की राजनीति का व्यापार।
Tuesday, January 6, 2009
जुदाई
ज़िन्दगी मेरी ज़िन्दगी न रही, मौत न जाने क्यों करीब हो गई,
बैठे बिठाये ऐसे जीवन बिखेरा मैंने, कि मुझ पर मेरी तकदीर रो गई।
जिनकी मुस्कराहट से होती थी सुबहे, जिनके आँचल मैं ढलती थी शाम,
दर्द दिया उनको ऐसा मैंने की, छलक पड़े उनकी अश्को के जाम।
बस अपनी हाथ पर रहा मैं, और अपनी मुर्खता पर मुस्कुराया,
बार-बार दिल तोडा उनका, की अब दूर हो गई उनके प्यार की छाया।
अपनों के दूर होने का दर्द, शायद आज मैं समझ पाया हूँ,
लेकिन अब इतनी देर हुई हैं कि, आज मैं अपनी छाया हूँ।
हाथ जोड़ माफ़ी मांगता हूँ तुमसे, मैं बहुत तुम्हें रुलाया हूँ,
दूर न जा तू मुझे छोड़कर, आज मैं बहुत पछताया हूँ।
आज ये वादा करता मैं तुझसे, अब दुबारा ये गलती न होगी,
दूर न जा तू मुझे छोड़कर, क्यूंकि तेरे बिन ज़िन्दगी, ज़िन्दगी न होगी।
बैठे बिठाये ऐसे जीवन बिखेरा मैंने, कि मुझ पर मेरी तकदीर रो गई।
जिनकी मुस्कराहट से होती थी सुबहे, जिनके आँचल मैं ढलती थी शाम,
दर्द दिया उनको ऐसा मैंने की, छलक पड़े उनकी अश्को के जाम।
बस अपनी हाथ पर रहा मैं, और अपनी मुर्खता पर मुस्कुराया,
बार-बार दिल तोडा उनका, की अब दूर हो गई उनके प्यार की छाया।
अपनों के दूर होने का दर्द, शायद आज मैं समझ पाया हूँ,
लेकिन अब इतनी देर हुई हैं कि, आज मैं अपनी छाया हूँ।
हाथ जोड़ माफ़ी मांगता हूँ तुमसे, मैं बहुत तुम्हें रुलाया हूँ,
दूर न जा तू मुझे छोड़कर, आज मैं बहुत पछताया हूँ।
आज ये वादा करता मैं तुझसे, अब दुबारा ये गलती न होगी,
दूर न जा तू मुझे छोड़कर, क्यूंकि तेरे बिन ज़िन्दगी, ज़िन्दगी न होगी।
Subscribe to:
Posts (Atom)