Friday, August 28, 2009

कहानी एक Cinema Hall की

यारों आपको एक थिएटर के Night Show की, दास्ताँ सुनाता हूँ,
उसमें चल रहे चलचित्र के साथ, लोगो के बदलते Expressions बताता हूँ,

Movie नई Release हुई थी, और बड़े नामों से सजी हुई थी,
सभी लोग Movie की पटकथा को नई और रोमांचक बता रहे थे,
असली में लडकियां Hero और लड़के Heroien को देखने जा रहे थे,

चलचित्र का Hero जवान , बुद्धिमान और College में पढ़ रहा था,
Heroine अमीर और सुंदर थी जिस पर नखरो का बुखार चढ़ रहा था,


जहाँ Screen पर Hero, Heroine के नखरो से त्रस्त था,
वहीं Corner Seat पर लड़का, अपनी पडोसन के साथ व्यस्त था,

दोनों को देख, बगल में बैठे बूढे को भी जोश आया,
और उसने इशारे से बुढ़िया को, Unsensored Scene दिखाया,
बूढे का इरादा समझ, पहले तो बुढिया सकपकायी
फिर Emotion Control कर, धीरे से बुदबुदायी,

ये जवानी का जोश है, जो अब शुरू होकर सुबहे तक जाएगा,
आपकी तरह नही, की शुरू होने से पहले ही ठंडा पड़ जाएगा,

Heroine अब शादी कर अपने ससुराल जा चुकी थी,
और सास की सेवा कर, तिजोरी की चाबी पा चुकी थी,
ये देख Family में आई एक नई दुल्हन, बहुत डर रही थी,
क्यूंकि उसकी सास, उसका Comparison Filmy बहु से कर रही थी,

इधर सास का Expectation Level उपर जा रहा था,
उधर बहु को अपना Future सोच, पसीना आ रहा था,

तभी Light जली, और Theater मैं उजियारा छा गया,
ये देख पिचली सीट पर बैठे लड़के का दिल बोला,
"साला अभी तो मूड बना था, ये INTERVAL कहाँ से आ गया",

INTERVAL होते ही, लड़की को भूख लग आई थी,
और लड़के से उसने, Popcorn और Coke मंगाई थी,
Multiplex के दाम देख, लड़के को पसीना आया,
और वो, बस एक Small Popcorn और Coke लाया,

1 Popcorn और Coke देख लड़की ने पुछा,
बस अपने लिए लाये हो, मुझे क्या भूखा रहना पड़ेगा,
इस पर लड़के ने अपना पैंतरा फैंका, और बोला,
"जान दोनों बाँट के खाएँगे, तो प्यार और बढेगा",

इतने में लाइट बुझी, और पूरे Theater में अँधेरा छा गया,
कुछ मनचलों ने हरकतें की और बोले, "यार मजा आ गया"

अब Movie का अंत करीब आ चुका था,
वाहीं खलनायक, अत्याचाको का Peak पा चुका था,
इधर वो Heroine को अड्डे पर नचा रहा था,
उधर कोई सीटियाँ, तो कोई गालियाँ सुना रहा था,

मार्मिक और संवेदनशील Climex देख, जहाँ कुछ लोग रो रहे थे,
वहीं कुछ लोग आराम से अपनी सीट पर, A/C में मजे से सो रहे थे,

सीटियों और गालियों के बीच Movie का अंत आ गया था,
और अंत में आलिंगन का द्ष्य, Censor Board खा गया था,

Movie से निकलते हुए, सभी दर्शक मुस्कुरा रहे थे,
कुछ इसे Blockbuster, तो कुछ पैसा वसूल बता रहे थे,

Movie से निकलती एक Family, बड़ी खुशी जाता रही थी,
लेकिन उनके छोटे बच्चे की सूरत, कुछ और ही व्यथा गा रही थी,
Movie देख एक विचार, उसके जेहन में बैठ जाता है,
अगर बाप शराबी और अत्याचारी हो, तभी बच्चा Hero बन पाता है,

ये सो़च अपना भविष्य जानकर, बच्चा बड़ा दुखी हो गया था,
क्यूंकि शरीफ बाप पाकर, उसके Hero बनने का Chance खो गया था।

4 comments:

Deepti Sharma said...

Hilarious! You should become a Hasya Kavi Sammelan regular.

Pradeep Dubey said...

Mast He Window . Goood One hehehe

Unknown said...

Marvellous dude!
Keep it up. Shayari group join kar lo.

Ashok Ramchandani said...

Sahi haasyana andaaz hai Window sir...aapne to humari movie dekhne ka nazaria hi badal daala....lage raho Window Sirf