इस देश के बड़े शहरों में एक नया culture आया है ,
इसको और कोई नही पढ़ा-लिखा software इंजिनियर लाया है,
ये दाल रोटी, नहीं विदेशी ठप्पे वाला burger खाता है,
और पेट निकलने, पर A/C Gym की Trade Mill पर पाता है,
बस थोडी सी कसरत करने में, पसीने से चूर हो जाता है,
और a/c Resturent में जाकर, वो fat-free जूस मंगाता है,
स्कूल के दोस्तों से ज़्यादा करीब, उसके ONLINE यार है,
माँ की रोटी से ज़्यादा उसे, SUBWAY की SALAD से प्यार है,
Weekend का नाम सुनते ही उसका चेहरा, खुशी से खिल जाता है,
Friday रात की शराब का नशा, Monday तक मुश्किल से जाता है,
देर रात तक काम के नाम पर बस chatting करता पता है
और उसे appraisal के समय अपना hard work बताता है,
Process follow करने की आदत उसमें इतनी परिपक्व है,
उसके पास अपनी सभी प्रेमिकाओं के Backup है,
Hike एवं Promotion की चाह में सभी Companies में घूम जाता है,
और ONSITE की चाह में वो, बांग्लादेश तक घूम कर आता है,
US RETURN के बाद, भारत की हर चीज़ को UNHYGENIC पता है,
खाने में उसको, SANDWITCH और MINIRAL WATER भाता है,
"When I was in US" और "Sorry" तो, ऐसे ज़बान पर चढ़ जाता है,
और ठेले वाले को भी अंग्रेजी में बात कर, क्रेडिट कार्ड दिखता है
उसका जीवन, सब भौतिक सुविधाओं को पाने की दौड़ में व्यस्त है,
और छुट्टियो के लिए वो, अपने MANAGER से त्रस्त है,
वो अपने देश से प्यार, तो अपार करता है,
और देश भक्ति की EMAIL FORWARD कर,विचार करता है
देशवासिओं की व्यथा पढ़कर, ये गमगीन हो जाता है,
फिर रात मैं किसी PUB में, अपना गम मिटाता है
देश की कमियाँ उजागर करने मैं वो EXPERT है,
लेकिन देश सुधार का बीडा उठाने में, जिस्मी हर्ज़ है
अगर ऐसा रहा तो ये युवा, एक ऐसी सभ्यता लायेगा,
जिसमें मेरा देश, शायद अपनी पहचान खो जाएगा।
Monday, May 25, 2009
Thursday, May 21, 2009
मेरा देश और राजनीति
आइये मैं आपका परिचय, अपने देश से करता हूँ,
और यहाँ की जनता, एवं राजनीति समझाता हूँ,
हमारे देश की जनता, बड़ी दिग्भ्रमित है ,
इस देश मैं कोई उच्च हैं, तो कोई दलित हैं,
अपने फैसले को, ख़ुद नही समझ पाती हैं,
और हर पाँच साल में, फिर से चोट खाती है,
कभी पंजा, कभी चक्का, कभी साइकिल चलाती है,
और कभी सबके जुगाड़ से, हाथी को बैठाती हैं,
जहाँ आम आदमी अपनी मेहनत से, देश सींच रहा है,
वहीं हमारा नेता जनता का धन, अपने घर खींच रहा है
ये अहिंसा और जनहित के नाम पर, अपनी कमजोरी छुपाता है,
और अपने घर के लिए, आतंकवादी स्वतंत्र कराता है,
ये वाही हैं जो कुर्सी के लिए, गन्दी राजनीति चलाता है,
और अपने स्वार्थ में, देश में टुकडे और दंगे कराता है।
अगले दिन फिर देश के नाम, उसका शान्ति शंदेश आता है,
और इन सब के लिए, विदेशी ताकत, और विपक्ष जो जिम्मेदार बताता है,
कहता है दंगे में मारा हर आदमी, उसका अपना भाई था,
और जो बच गया, वो विपक्ष का भेजा हुआ कसाई था,
हम लोग फिर भावनाओं में बहकर, उसे माफ़ कर जाते हैं,
और फिर एक कमजोर को, अपनी देश की गद्दी पर बैठाते है,
फिर से पाँच साल वो नेता, पुरानी कहानी दोहराता है,
फिर हमको लूट, देश और थोड़ा खोखला कर जाता है,
धर्म, जात, धन और क्षेत्रवाद के नाम पर हम,
एक नेता से, जाते है सब अपने अधिकार हार,
जय हो मेरे देश का प्रजातंत्र,
जय हो यहाँ की राजनीति का व्यापार।
और यहाँ की जनता, एवं राजनीति समझाता हूँ,
हमारे देश की जनता, बड़ी दिग्भ्रमित है ,
इस देश मैं कोई उच्च हैं, तो कोई दलित हैं,
अपने फैसले को, ख़ुद नही समझ पाती हैं,
और हर पाँच साल में, फिर से चोट खाती है,
कभी पंजा, कभी चक्का, कभी साइकिल चलाती है,
और कभी सबके जुगाड़ से, हाथी को बैठाती हैं,
जहाँ आम आदमी अपनी मेहनत से, देश सींच रहा है,
वहीं हमारा नेता जनता का धन, अपने घर खींच रहा है
ये अहिंसा और जनहित के नाम पर, अपनी कमजोरी छुपाता है,
और अपने घर के लिए, आतंकवादी स्वतंत्र कराता है,
ये वाही हैं जो कुर्सी के लिए, गन्दी राजनीति चलाता है,
और अपने स्वार्थ में, देश में टुकडे और दंगे कराता है।
अगले दिन फिर देश के नाम, उसका शान्ति शंदेश आता है,
और इन सब के लिए, विदेशी ताकत, और विपक्ष जो जिम्मेदार बताता है,
कहता है दंगे में मारा हर आदमी, उसका अपना भाई था,
और जो बच गया, वो विपक्ष का भेजा हुआ कसाई था,
हम लोग फिर भावनाओं में बहकर, उसे माफ़ कर जाते हैं,
और फिर एक कमजोर को, अपनी देश की गद्दी पर बैठाते है,
फिर से पाँच साल वो नेता, पुरानी कहानी दोहराता है,
फिर हमको लूट, देश और थोड़ा खोखला कर जाता है,
धर्म, जात, धन और क्षेत्रवाद के नाम पर हम,
एक नेता से, जाते है सब अपने अधिकार हार,
जय हो मेरे देश का प्रजातंत्र,
जय हो यहाँ की राजनीति का व्यापार।
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