Thursday, September 6, 2007

पहली मुलाकात

चाँद की रोशनी में रोशन सितारें हों,
उनके पहलु में छिपें जीवन के नज़ारे हों,
आँखों में प्यार, दिल मैं ख्वाहिशें हों भरी,
हल्की ठंडी पुरवाई मैं मेरी अप्सरा हों खड़ी,
हुस्न ऐसा की खुदा भी बेईमान हों जाए,
उसके साथ और पल भर मैं सुबहें से शाम हों जाए

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